हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

लेखक : जावेद अहमद गामिदी अनुवादक : मुश्फ़िक़ सुल्तान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (वचन), फेअल (कार्य) और ‘तक़रीर-व-तस्वीब’[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (विवरण) को इस्लामी परिभाषा में ‘हदीस’ कहा More »

क्या पवित्र कुरआन ईश्वरीय ग्रंथ है या हज़रत मुहम्मद की रचना?

क्या पवित्र कुरआन ईश्वरीय ग्रंथ है या हज़रत मुहम्मद की रचना?

प्रथम प्रमाण: आज यह बात सारे धार्मिक इतिहासकार स्वीकार कर चुके हैं, कि हज़रत मुहम्मद ईमानदारी से यह विश्वास रखते थे कि उन्हें ईश्वर की ओर से संदेश प्राप्त हो रहा था। More »

 

एक हदीस के बारे में शंका का समाधान

 عن أبي ذر رضي الله عنه قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم أتاني آت من ربي فأخبرني أو قال بشرني أنه من مات من أمتي لا يشرك بالله شيئا دخل الجنة قلت وإن زنى وإن سرق قال وإن

अख्लाक़ियात (इस्लाम की नैतिक शिक्षा) – भाग 1

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी अनुवादक: मुश्फिक़ सुल्तान ईमान के बाद दीन की दूसरी बड़ी अपेक्षा तज़्किया-ए-इखलाक (नैतिक शुद्धि) है। इस का अर्थ यह है, कि इन्सान खल्क़ और ख़ालिक़ (ईश्वर और ईश्वर की रचना), दोनों से जुड़े अपने व्यवहार को

Hindus used to eat beef and Vedas permit beef eating – Swami Vivekananada

कुरआन में परस्पर विरोधी बातें है?

सवाल: कुरआन में बताया गया है कि अगर यह अल्लाह के सिवा किसी की तरफ से होता तो इस में बहुत सी परस्पर विरोधी बातें मिलती। क्या कारण है कि जब हम कुरआन पढ़ते हैं तो कई आयतों में हमें

ईमान-ए-मुफ़स्सल और ईमान-ए-मुजमल क्या हैं?

सवाल मेरा सवाल यह है कि ईमान-ए-मुफ़स्सल और ईमान-ए-मुजमल क्या हैं? और ईमान-ए-मुफ़स्सल में खैर और शर की जो बात कही गई है और उन को अल्लाह के साथ जोड़ा गया है, इस को समझने में मेरी मदद कीजिए। जवाब

Protected: درس قرآن – سوره المائدہ- استاذ جاوید احمد غامدی

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इस्लाम क्या है?

इस्लाम अल्लाह का भेजा हुआ दीन है। इस को बुनियादी तौर पर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। एक का संबंध ईमान-ओ-अखलाक (मान्यता एवं नैतिकता) से है और दूसरे का संबंध कानून से है। ईमान के अंतर्गत कुछ तथ्य

हदीस अध्ययन के उसूल (सिद्धान्त)

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लेखक : जावेद अहमद गामिदी अनुवादक : मुश्फ़िक़ सुल्तान नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) के क़ौल (वचन), फेअल (कार्य) और ‘तक़रीर-व-तस्वीब’[1] (स्वीकृति एवं पुष्टि) की रिवायतों (विवरण) को इस्लामी परिभाषा में ‘हदीस’ कहा जाता है।  यह रिवायतें अधिकतर ‘अखबार-ए-आहाद’[2] के तौर

क्या पवित्र कुरआन ईश्वरीय ग्रंथ है या हज़रत मुहम्मद की रचना?

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प्रथम प्रमाण: आज यह बात सारे धार्मिक इतिहासकार स्वीकार कर चुके हैं, कि हज़रत मुहम्मद ईमानदारी से यह विश्वास रखते थे कि उन्हें ईश्वर की ओर से संदेश प्राप्त हो रहा था। उदाहरणार्थ विलियम मोंटगोमेरी वाट (William Montgomery Watt) अपनी

A common Hindu query about Hajar al-Aswad answered and its Significance explained

Question Certain Hindus allege that Hajar Aswad (the Black Stone) in the Kaaba is Shiv Ling, which was worshiped by the Arabs and Muslims worship this stone and hence are idolators. How should we respond to this? What is the

Concept of Justice in Islam